28 February 2026 12:00 AM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। न्याय दिलाने की प्रक्रिया में पुलिस एक ऐसी कड़ी है जो न्यायालय तक सही और ग़लत को पानी की तरह साफ पेश कर सकती है। अगर पुलिस ईमानदारी से जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश कर दे तो न्याय दम नहीं तोड़ सकता। पुलिस की रिपोर्ट न्याय दिलाने में बेहद सहायक सिद्ध होती है। लेकिन यही पुलिस जब सबकुछ स्पष्ट होने के बावजूद दोषी को निर्दोष और निर्दोष को दोषी प्रमाणित कर दे तो न्याय दम तोड़ देता है।
बीकानेर की सदर पुलिस के एक जांच अधिकारी पर ऐसा ही कुछ अन्यायपूर्ण कार्य करने का आरोप है। मामला नोखा निवासी हड़मानाराम के तलाक के केस से जुड़ा है। दरअसल, हड़मानाराम की पत्नी अभी पीहर है। उसके विवाह को 20 वर्ष हो चुके हैं। वह अपनी पत्नी के साथ ही रहना चाहता है, इसी भावना को लेकर उसने न्यायालय में घर बसाने का केस लगा रखा है।
आरोप है इस केस के बीच ही फरवरी माह की तारीख पेशी में हड़मानाराम लखारा व उसका मित्र दिनेश लखारा कोर्ट आए हुए थे। तभी उसके साले नरसीराम का फोन आया। नरसी ने हड़मानाराम को कोर्ट के बाहर कुछ बात करने के लिए बुलाया। हड़मानाराम अपने मित्र दिनेश के साथ गया। दिनेश ने मोबाइल में वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन कर रखी थी।
आरोपी नरसीराम ने जीजा हड़मानाराम से पचास लाख रूपए की अवैध मांग की। कहा कि पचास लाख रूपए दो तो वह अपनी बहन से पीछा छुड़ा देगा। और उसकी शादी किसी बिहारी लड़की से भी करवा देगा।
हड़मानाराम ने पचास लाख रूपए देने से इंकार करते हुए कहा कि वह उसकी बहन के साथ घर बसाना चाहता है, तलाक नहीं चाहता। वीडियो में बहुत सारे चौंकाने वाले तथ्य स्पष्ट सुनाई और दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद हड़मानाराम ने सदर थाने में पैसे की अवैध मांग को लेकर अपने साले नरसीराम के खिलाफ परिवाद दिया। मुकदमा दर्ज हुआ।
परिवादी के अधिवक्ता अनिल सोनी के अनुसार मामले की जांच हैड कांस्टेबल गोपाल जांगिड़ को दी गई। परिवादी ने सबूत के तौर पर वीडियो भी पेश कर दिया। जांच अधिकारी ने सारे सबूत होने के बावजूद आरोपी नरसीराम को निर्दोष मानते हुए अंतिम रिपोर्ट पेश कर दी। इस पर परिवादी द्वारा सदर पुलिस की जांच को कोर्ट में चैलेंज किया गया। एडवोकेट अनिल सोनी ने बताया कि न्यायालय ने वीडियो देखकर हैड कांस्टेबल गोपाल जांगिड़ की जांच को संदेहास्पद माना। उन्होंने मामले में टिप्पणी करते हुए सदर थानाधिकारी को नया जांच अधिकारी नियुक्त मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।
बताया जा रहा है कि अनुसंधान अधिकारी ने अपनी जांच में स्पष्ट रूप से लिखा है कि वीडियो देखने पर यह पुष्टि होती है कि आरोपी नरसीराम ने परिवादी हड़मानाराम से पचास लाख रूपए की मांग की है। बताया जा रहा है कि अनुसंधान अधिकारी ने परिवादी के बयान ही नहीं लिए, केवल आरोपी और आरोपी की तरफ से दो गवाहों के बयान लेकर आरोपी को दोषमुक्त करार दे दिया। इस मामले से पुलिस जांच की प्रामाणिकता कठघरे में है।
अब सदर पुलिस को नये जांच अधिकारी से निष्पक्ष रूप से जांच करवाकर नतीजा 26 मई तक न्यायालय में पेश करना होगा। अब देखना यह है कि पुलिस कितनी निष्पक्षता से जांच करती है। आप भी वीडियो देखें, वीडियो में खड़े खड़े जो बात कर रहा है वह परिवादी हड़मानाराम है तथा जो स्कूटी पर बैठा बात कर रहा है वह आरोपी नरसीराम है। देखें वीडियो
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