25 February 2026 06:36 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। कहते हैं जहां का राजा उदासीन होता है वहां जनता का भाग्य दुर्भाग्य में बदलते देर नहीं लगती। लोकतंत्र में राजा की जगह जनता के सेवक यानी पार्षद, विधायक, महापौर और सांसद आदि ने ले ली। ये बदलते रहे, लेकिन बदला नहीं तो हमारा भाग्य। हमारा बीकानेर शहर इस वक्त ऐसे ही दुर्भाग्य से जूझ रहा है। ऐसा लगता है जैसे इस शहर का अब कोई "धणी-धोरी" ही नहीं रहा। अंधा आदमी भी सड़क पर चलकर यहां के हालात महसूस कर सकता है, फिर पता नहीं क्यूं जनता के सेवकों को यह सब कैसे दिखाई नहीं देता।
हर तरफ टूटी, गड्ढ़ेदार सड़कें, सीवरेज के ऊपर उठे तो कहीं धंसे हुए ढ़क्कन, कचरे के ढ़ेर और अंधेरा सहित अनेकों ऐसी समस्याएं हैं, जिनसे जनता को जूझना पड़ रहा है। दो विधानसभा क्षेत्रों में बंटे बीकानेर शहर का उद्धार होगा भी या नहीं, यह अब कोई कह नहीं सकता।
आज हम बात कर रहे हैं बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र की सड़कों की। पूर्व की इसलिए, क्योंकि यहां की विधायक इस क्षेत्र को लेकर सबसे अधिक उदासीन रही। 2008 में बीजेपी की सीट से चुनाव जीतकर विधायक बनीं सिद्धि लगातार चौथी बार विधायक है, यानी अभी तक वें 18 साल राज कर चुकी हैं। इस बीच नगर निगम में भी बीजेपी की सत्ता रही। लेकिन बीकानेर पूर्व के हालात देखें तो 18 साल में अभी तक मूलभूत आवश्यकताओं में आने वाली सड़कें ही नहीं सुधार पाई। अब आप कहेंगे, सारे काम विधायक के थोड़ी होते है। तो भाई कम से कम विधायक कोटे की राशि के सही उपयोग की जिम्मेदारी तो विधायक की होती है। वैसे अपने विधानसभा क्षेत्र की मॉनिटरिंग करने का दायित्व और अधिकार तो विधायक का ही होता है।
हमने जब तहकीकात की तो सामने आया कि विधायक कोटे से पास हुई सड़कें कहीं बनीं ही नहीं, कहीं बनीं तो गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं हुआ। ऐसा लगता है जैसे कोई सड़क ही खा रहा है। सिद्धि कुमारी ने सड़कों के लिए करोड़ों का बजट दिया। अभी तक पिछले बजट की सड़कें ही नहीं बनीं है। नये बजट की सड़कें भी लटकी हुई है। उपनगर गंगाशहर के साथ तो सबसे अधिक अन्याय होता दिख रहा है। 2024 में पाबू चौक से बोथरा चौक प्रथम व द्वितीय होते हुए हरिराम जी मंदिर चौक तक सड़क पास हुई थी, उस सड़क का आजतक अता पता नहीं। जैन मंदिर से चोरड़िया चौक होते हुए बोथरा चौक 2 की तरफ जाने वाली सड़क हो या मुख्य बाजार से गांधी चौक होते हुए नोखा रोड़ जाने वाली सड़क हो, सबकुछ बिगड़ा हुआ है। गांधी चौक नोखा रोड़ तक की सड़क तो पिछले कई सालों से दयनीय स्थिति में हैं। यहां कभी मिट्टी डाली जाती है तो कभी मिट्टी के साथ कंकर। गंगाशहर की नई कॉलोनियों में भी हालात बहुत ज्यादा खराब है। इसी तरह रानी बाजार क्षेत्र भी काफी बुरी स्थिति में हैं। कहीं डामर की चादर बिछाने को सड़क कहा जा रहा है तो कहीं मिट्टी व कंकरों से गड्ढे भरने सड़क कहा जा रहा है।
यहीं पर विधायक की मॉनिटरिंग महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि अन्य विभागों व कोटों से घोषित सड़कों पर भी कुछ सकारात्मक सामने नहीं आया है। हर चुनाव से पहले कुछ चेपे लगाए जाते हैं जैसे सड़क कोई फटी पतंग हो।
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