03 November 2026 11:06 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। फर्जी मुख्तियारनामे से करोड़ों की भूमि अपने नाम करवाने का 12 साल पुराना प्रकरण एक बार फिर पुलिस जांच के दायरे में आ चुका है। न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02 बीकानेर ने इस संबंध में महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए अग्रिम अनुसंधान के आदेश दिए हैं।
ये है मामला: युद्धवीर सिंह व संजय सिंह ने सदर थाने में समीक्षा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक लालचंद गौड़ व उसके कर्मचारी नेमाराम के खिलाफ जमीन के फर्जीवाड़े का आरोप लगाया। परिवादी के अनुसार ग्राम उदयरामसर व ग्राम सालासर, जैसलमेर रोड़ के पास परिवादी की करोड़ों रूपयों की कृषि भूमियां है।
आरोप है कि लालचंद गौड़ ने नेमाराम का फर्जी मुख्यानामा आम बनाकर उससे जमीनें अपने नाम करवा ली। कुछ कृषि भूमि आगे भी बेच दी गई। परिवादी के अनुसार उन्होंने कभी भी नेमाराम को मुख्तयार आम बनाया ही नहीं। यह सब एक षड्यंत्र है। जिस मुख्तयार नामा आम के आधार पर आरोपियों ने जमीन विक्रय की उस पर संजय सिंह ने कभी हस्ताक्षर किए ही नहीं। परिवादी के फर्जी हस्ताक्षर कर यह सारा खेल खेला गया।
-पुलिस ने नहीं की हस्ताक्षर की प्रामाणिकता की जांच: आरोप है कि लालचंद ने तत्कालीन एसपी से मिलकर जांच बदलवा ली। बाद में जांच अधिकारी ने जल्दबाजी में हस्ताक्षर की एफएसएल करवाए बिना ही एफआर लगा दी।
-परिवादी पहुंचा न्यायालय: परिवादी पुलिस जांच से असंतुष्ट होकर न्यायालय पहुंच गया। एडवोकेट अनिल सोनी के मार्फत न्यायालय में अर्जी लगाई गई। मुख्तयारनामा आम पर अंकित संजय सिंह के हस्ताक्षरों की एफ एस एल जांच व मुख्य बिंदुओं की गहन जांच की अपील की गई।
एडवोकेट अनिल सोनी ने बताया कि न्यायालय की पीठासीन अधिकारी माधवी मोदी ने प्रकरण पर सुनवाई करते हुए मामले में पुनः अनुसंधान के आदेश दिए हैं। आदेश दिया गया है कि मुख्तयारनामा आम पर अंकित हस्ताक्षरों की एफ एस एल रिपोर्ट करवाई जाए। वहीं अन्य बिंदुओं पर भी गंभीर जांच की जाए।
सोनी के अनुसार पीठासीन अधिकारी माधवी मोदी ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि कूटरचना से संबंधित मामलों में विवादित दस्तावेजों की एफएसएल जांच करवाए बिना निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। बता दें कि उक्त मामला 2014 का है जबकि 2022 में मामले में मुकदमा दर्ज हुआ।
RELATED ARTICLES