12 June 2026 12:33 AM

ख़बरमंडी न्यूज़, कोटा। कोटा पुलिस ने कोटा के बहुचर्चित महंत देवानंद महाराज हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। कोटा पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपी 52 वर्षीय एडवोकेट संतोष राय पुत्र विष्णुदेव ब्राह्मण व टेगोर नगर महादेव जी मंदिर के सामने, नया गांव पेट्रोल पंप के पीछे वाली कॉलोनी, आर के पुरम थाना क्षेत्र, कोटा निवासी 20 वर्षीय पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस पुत्र अमर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि आदित्य वर्मा, अंकित बैरवा व एक अन्य की तलाश जारी है।
ये था घटनाक्रम: 5 जून 2026 की अर्धरात्रि कोटा के चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की चाकु मारकर हत्या कर दी गई। हत्या उस समय की गई, जब महंत देवानंद मठ में स्थित अपने कक्ष में सो रहे थे। कोटा एसपी तेजस्वनी गौतम ने बताया कि आरोपियों ने सोते हुए महंत पर हमला किया। उन्हें लहुलुहान हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले में मठ के कोषाध्यक्ष ब्रजमोहन गुर्जर ने रिपोर्ट दी।
-1100 वर्ष पुराने चंद्रेसल मठ की 750 बीघा जमीन हड़पने के लिए एडवोकेट ने रची साजिश और दे दी मर्डर की सुपारी: चंद्रेसल मठ 1100 वर्ष पुराना मठ है। इसकी 750 बीघा जमीन है। 4.33 करोड़ की नकद संपत्ति भी है। कुछ जमीन पर लोगों का कब्जा भी है। पूर्व में गोस्वामी समुदाय के लोग यहां पूजा अर्चना करते थे। 1995 में वन समुदाय के किशोरवन महाराज यहां आए और अतिक्रमियों से इस मठ को मुक्त करवाने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की। 1998 में इसे ट्रस्ट बनाया गया। 2007 में वन समुदाय के नंदनवन महाराज आए, उन्होंने मठ संभाला। किशोर वन महाराज व नंदन वन महाराज 2017 तक एक साथ रहे। फिर दोनों में विवाद होने लगे तो किशोर वन महाराज ने मठ छोड़ दिया। तब से अब तक नंदन वन महाराज ही यहां पूजा अर्चना कर रहे हैं। इस बीच 2024 में यहां देवानंद महाराज आए गये। उन्होंने यहां सामुहिक विवाह सम्मेलन करवाया। बाद में लोगों की इच्छा से देवानंद महाराज यहां सामान्य धार्मिक आयोजन करवाने लगे। अल्पकालिक प्रवास भी शुरू कर दिया।
देवानंद महाराज ने कुछ समय पहले मठ के ट्रस्ट की नयी कार्यकारिणी का गठन कर दिया। कानूनी मान्यता हेतु भी आवेदन किया। मगर पुरानी कार्यकारिणी को यह बात जमी नहीं। पुरानी कार्यकारिणी ने नयी कार्यकारिणी की मान्यता नहीं देने की अपील करते हुए आपत्ति दर्ज करवाई। पुरानी कार्यकारिणी की तरफ से कानूनी लड़ाई एडवोकेट संतोष राय द्वारा शुरू की गई। संतोष राय ने स्वयं को कार्यकारी अध्यक्ष भी घोषित कर दिया। वह मठ का संचालन स्वयं करना चाहता था। लेकिन बात बन नहीं रही थी। उसके सपनों पर पानी फिर रहा था। इससे खफा एडवोकेट संतोष राय ने आदित्य वर्मा नाम के बदमाश को देवानंद महाराज की हत्या की सुपारी दे दी। आदित्य एक लाख में हत्या करने को तैयार हो गया। एडवोकेट संतोष ने आदित्य का प्रेम विवाह करवाया था। वह संतोष राय का अंधा भक्त था।
आदित्य ने हत्या की साज़िश में अपने मित्र अंकित बैरवा, पुष्पेन्द्र सिंह उर्फ प्रिंस व एक अन्य को शामिल कर लिया।
1 जून को एडवोकेट संतोष राय ने आदित्य को मठ दिखाया। देवानंद महाराज की दिनचर्या भी समझाई। 5 जून की रात्रि में हत्या करना तय हुआ।
किसी को हत्या की साज़िश में एडवोकेट पर शक ना हो इसलिए वह 2 जून को जयपुर चला गया। वह जयपुर में पैर की सर्जरी के बहाने अस्पताल में भर्ती हो गया।
5 जून की रात 11 बजे बाद आदित्य, पुष्पेन्द्र, अंकित व अन्य दो मोटरसाइकिलों पर सवार होके मठ पहुंचे। आरोपियों ने पहले नंदनवन महाराज के कमरे की बाहर से कुंदी लगा दी। इसके बाद दूसरे कमरे में सोए हुए देवानंद महाराज पर चाकु से हमला कर दिया। देवानंद महाराज की आंख खुल गई, उन्होंने बाहर भागने का प्रयास किया। लेकिन अंकित, पुष्पेंद्र, आदित्य व अन्य ने देवानंद महाराज को दबोचकर उनकी पीठ पर चाकु से ताबड़तोड़ वार किए। इसके बाद घटनास्थल से फरार हो गए।
-एसपी ने गठित की एसआईटी, पाताल से खोज निकाले बदमाश: मामला आस्था से जुड़ा होने के कारण कोटा एसपी तेजस्वनी गौतम ने एएसपी सुभाषचंद्र मिश्रा के नेतृत्व में एस आई टी गठित की। कोटा एसपी तेजस्वनी गौतम के निर्देशन में टीम ने मुखबिर तंत्र, डॉग स्क्वायड, एम ओ बी आदि की सहायता से हत्या के आरोपियों का पता लगा लिया।
बताया जा रहा है कि बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में स्थित इस मठ के दूर दूर तक कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। ऐसे में पुलिस के सामने बड़ा चैलेंज खड़ा हो गया। दूसरी तरफ आस्था का विषय होने की वजह से दबाव भी काफी अधिक था।
ये थे टीम में शामिल: एसपी तेजस्वनी गौतम द्वारा गठित एएसपी सुभाष चन्द्र मय एस आई टी में एएसपी मुकेश सांखला, आरपीएस रुद्रप्रकाश शर्मा, आरपीएस मनीष शर्मा, आरपीएस योगेश शर्मा, सीआई अनिल टेलर, सीआई रामस्वरूप, सीआई मांगेलाल यादव, सीआई रामलक्ष्मण, सीआई मुकेश कुमार, सीआई देवेश भारद्वाज, सीआई महेंद्र मारु व सब इंस्पेक्टर ज्योति मोर्य शामिल थी। साईबर सैल, डीएसटी व थाना टीम का सहयोग रहा। अभियुक्तों की पहचान करने व उन्हें खोज निकालने में कांस्टेबल लक्ष्मण 1380 व कांस्टेबल सुनील चंदेल 1979 की मुख्य भूमिका रही।
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