17 October 2026 12:28 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। जैसे सुंदरकांड, रामचरित मानस व दुर्गा सप्तशती आराधना विधियां हैं वैसे ही गरबा-डांडिया भी मूलतः मांग दुर्गा की आराधना के नृत्य हैं। मगर इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां इनका व्यवसायिकरण करते हुए गरबा डांडिया के धार्मिक स्वरूप को खंडित कर रही है। बीकानेर के एडवोकेट ने मां दुर्गा की आराधना के इस नृत्य को फूहड़ मनोरंजन का स्वरूप देने के खिलाफ शिकायत की है। एडवोकेट ने जिला कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट निशांत जैन व मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर ऐसे आयोजनों के खिलाफ शिकायत की है।
एडवोकेट ने शिकायत में बताया है कि गरबा-डांडिया किसी भी तरह से मनोरंजन के साधन नहीं है, ये सब भक्ति के आनंद के विषय हैं। गरबा-डांडिया किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से भी संबंध नहीं रखते। एडवोकेट ने कहा है कि बीकानेर में कई गरबा डांडिया कार्यक्रम हो रहे हैं लेकिन कुछ कार्यक्रमों में इस भक्ति नृत्य की जमकर धज्जियां उड़ाई गई है। ढ़ोला मारू में आयोजित गरबा वेव्ज़ नाम के इवेंट में फिल्मों के वह गीत बजाए गए जो किसी भी रूप में भक्ति गीत नहीं है। गरबा नृत्य शुद्ध रूप से धार्मिक नृत्य है। इसके स्वरूप के साथ छेड़छाड़ करने की स्वतंत्रता किसी को नहीं होनी चाहिए।
इसके अतिरिक्त एम स्क्वायर के बॉलीवुड डांडिया की भी शिकायत की गई है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में नींबूड़ा जैसे गीत पर नृत्य किया गया। एडवोकेट ने कहा कि अगर फिल्मी नृत्य ही करना है तो कीजिए मगर गरबा और डांडिया की आड़ में धर्म का नाश नहीं करने देंगे।
बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ इवेंट कंपनियां मां दुर्गा की आराधना के इस नृत्य की जमकर धज्जियां उड़ा रही है। एक तरफ नवरात्र पर मां की पूजा व व्रत उपवास किए जाते हैं दूसरी तरफ माता की भक्ति परंपरा का उपहास किया जाता है। एडवोकेट ने कलेक्टर को लिखा है कि ऐसी गतिविधियों से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हो रही है। गरबा डांडिया कार्यक्रमों में भक्ति व परंपरागत गीत ही बजे, रह सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
अब देखना यह है कि शासन द्वारा इस गंभीर विषय पर कोई एक्शन लिया जाता है या इसी तरह धर्म का नाश होता रहता है।
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