26 March 2026 05:16 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। सात वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के मामले में एक मंदिर के पुजारी को बीकानेर के कोर्ट ने 20 साल के कठोर कारावास व तीन लाख एक हजार रूपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियुक्त अणखीसर, नोखा, बीकानेर निवासी 64 वर्षीय अणतुराम उर्फ अणदाराम पुत्र चूनाराम जाट पर 23 नवंबर 2022 को बीकानेर के छत्तरगढ़ थाने में धारा 363, 366, 342, 376(एबी), 376(3) आईपीसी, धारा 84 जेजे एक्ट, धारा 3/4(2), 5(एम)/6(1), 9(एम)/ पोक्सो एक्ट, धारा 354 ख आईपीसी व धारा 7/8 पोक्सो एक्ट आदि अपहरण व बलात्कार की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।
ये था मामला: घटना 23 नवंबर 2022 की है। पीड़िता स्कूल गई हुई थी लेकिन शाम 6-7 बजे तक घर नहीं लौटी तो बच्ची की मां उसे ढ़ूंढ़ते हुए घर से निकली। रास्ते पर स्थित एक मंदिर की दीवार पर बच्ची का बैग व दूध की बोतल दिखी। मंदिर के अंदर घुसी तो बच्ची के चीखने की आवाज आई। आवाज़ सुनकर खिड़की से झांका तो अंदर मंदिर के बाबा द्वारा बच्ची से दुष्कर्म किया जा रहा था। बच्ची की मां बाबा को पकड़ने के लिए भागी तो बाबा भाग छूटा। शोर मचाने पर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए।
सूचना पर छत्तरगढ़ पुलिस मौके पर आई। पुलिस ने पीड़िता के पिता की रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ व जांच करने पर जुर्म प्रमाणित पाया गया। न्यायालय ने अणदाराम को न्यायिक अभिरक्षा के तहत जेल भेज दिया। पुलिस ने 6 जनवरी 2023 को कोर्ट में चालान पेश किया, इसके बाद कोर्ट ट्रायल शुरू हुआ।
-कोर्ट में भी स्वीकार नहीं किया अपराध मगर डीएनए रिपोर्ट और पीड़िता के बयान आए काम: अभियुक्त अणदाराम ने कोर्ट में भी अपराध नहीं कबूला। अणदाराम के अधिवक्ता की ओर से अणदाराम को झूठा फंसाने सहित विरोधभासी बयान देने का आरोप लगाया।
मगर विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट सहित डीएनए रिपोर्ट से अपराध की पुष्टि हुई। वहीं पीड़िता ने भी बयान दिए थे कि वह जब स्कूल से घर की ओर लौटती थी तब अणदाराम उसे बहला-फुसलाकर मंदिर के अंदर ले जाता तथा उसके गलत काम करता था।
-कोर्ट ने सुनाई 20 साल की कठोर सजा, जुर्माना भी: न्यायालय में अपराध साबित होने पर विशिष्ट लोक अभियोजक ने अभियुक्त अणदाराम के नरमी अपनाने की अपील की। कहा कि वह वृद्ध है, उसका यह प्रथम अपराध है तथा वह अन्वीक्षा के दौरान लंबी अवधि तक जेल भुगत चुका है। मगर न्यायालय ने अपराध की प्रकृति बेहद गंभीर होने के कारण नरमी नहीं बरती। न्यायालय ने धारा 363, 366, 342, 376(एबी), 376(3) व 354 ख आईपीसी, धारा 84 जेजे एक्ट, धारा 3/4(2), 5(एम)/6(1), 9(एम)/10 पोक्सो एक्ट व धारा 7/8 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम में दोष सिद्ध मानते हुए अलग अलग धाराओं में 1 वर्ष, 5 वर्ष, 10 वर्ष व 20 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा सुनाई। वहीं अलग अलग धाराओं में कुल तीन लाख एक हजार रूपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थ दंड जमा ना करवाने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
बता दें कि सभी सजाएं साथ साथ चलेगी, ऐसे में अधिकतम 20 वर्ष की सजा भुगतनी होगी। इस 20 वर्ष में से अन्वीक्षा के दौरान जेल में बिताई गई अवधि घटाकर जेल भुगतनी होगी। यह कठोर कारावास की सजा है। वहीं न्यायालय ने अपील अवधि के बाद जुर्माना राशि पीड़िता को बतौर क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि यह सजा पीठासीन अधिकारी अनु अग्रवाल ने सुनाई। वहीं पीड़िता की ओर से पैरवी अधिवक्ता चतुर्भुज सारस्वत ने की।
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