18 February 2021 10:05 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। इन दिनों कानून व सभ्यता का मजाक उड़ाना प्रचलन सा बन गया है। गलत और फूहड़ता का विरोध करने वाले भारत में विरोध के तरीके ही फूहड़ व गलत होते जा रहे हैं। हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट की जस्टिस पुष्पा वी गनेडीवाला (Justice Pushpa Ganediwala) ने पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग से यौन शोषण मामले में अजीब फैसला सुनाया था। उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट को बगैर कपड़े उतारे छूना पॉक्सो एक्ट के तहत यौन हमला नहीं माना जाएगा। उनके इस फैसले को लेकर काफी विवाद हुआ था। जज के फैसले से नाराज होकर अब गुजरात की एक महिला ने उन्हें 150 कंडोम भेजे हैं।
देवश्री त्रिवेदी नाम की इस महिला ने 12 अलग-अलग जगहों पर कंडोम भेजे हैं, जिनमें जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला का चैंबर भी शामिल है। इसके अलावा देवश्री ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की रजिस्ट्री में भी कंडोम भेजे हैं। मीडिया सूत्रों के मुताबिक देवश्री का कहना है कि वह इस तरह की नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं करेंगी। जस्टिस गनेडीवाला की वजह से एक नाबालिग लड़की को न्याय नहीं मिला। देवश्री ने जस्टिस गनेडीवाला को सस्पेंड किए जाने की भी मांग की।
महिला होने के नाते कोई पछतावा नहीं'
देवश्री त्रिवेदी ने बताया कि उन्होंने गत 9 फरवरी को कंडोम के पैकेट भेजे थे। उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते मुझे नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत किया है। मुझे कोई पछतावा नहीं है। महिलाओं को अपने अधिकार के लिए खड़ा होना होगा। जस्टिस गनेडीवाला के इस फैसले के कारण यौन शोषण में लिप्त पुरुषों को सजा नहीं मिल पाएगी।
बताया जा रहा है कि देवश्री त्रिवेदी को अपनी इस हरकत के लिए सजा भी मिल सकती है। नागपुर बेंच की रजिस्ट्री ऑफिस की तरफ से बताया गया है कि उन्हें कंडोम के पैकेट नहीं प्राप्त हुए हैं। नागपुर बार एसोसिएशन के एक एडवोकेट ने इसे मानहानि का मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
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