10 May 2021 05:15 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी के मामले में मुख्य आरोपी भुवनेश शर्मा को पुलिस ने राउंड अप कर लिया है। वहीं गिरफ्तार चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर उन पर दो दिन का रिमांड लिया गया है। जेएनवीसी थानाधिकारी अरविंद भारद्वाज के अनुसार चारों को 12 मई को पुनः कोर्ट में पेश करना है। इसके अतिरिक्त बीती रात दबोचे गए सादुल गंज निवासी 48 वर्षीय सुनील कुमार के यहां सात खाली सिलेंडर भी जब्त किए बताते हैं।
पुलिस के अनुसार भुवनेश फरार था, अब उसे राउंड अप किया जा चुका है।
कोरोना काल में मौत के डर को हथियार बनाकर यह रैकेट लगातार ऑक्सीजन सप्लाई कर रहा था। 45 हजार रुपए प्रति सिलेंडर तक की दर से सिलेंडर बेचे जा रहे थे।
हैवानियत की हदें पार करने वाले इस पूरे रैकेट का मुख्य सरगना पीबीएम अस्पताल में पोस्टेड सरकारी कंपाउंडर भुवनेश शर्मा को बताया जा रहा है। बीएल मेमोरियल ट्रस्ट की आड़ में यह काला धंधा नागणेची स्कीम के मकान नंबर 24 से ऑपरेट हो रहा था। रेड के समय इस मकान से 37 सिलेंडर व चार सदस्य मिले। जिनमें ट्रस्ट का मुनीम सादुलगंज निवासी सुनील कुमार, सीएमएचओ ऑफिस का संविदाकर्मी भीखमचंद, तिलकनगर डिस्पेंसरी का प्रभुदयाल पुत्र कृष्ण कुमार व एंबुलेंस चालक बलवीर सिंह पुत्र ओनाड़सिंह शामिल था।
सूत्रों की मानें तो भुवनेश शर्मा को बचाने की कोशिशें चालू हो चुकी है। ऊंची पहुंच रखने वाले अलग अलग लोग भुवनेश को बचाने में एड़ी चोटी का जोर लगाएंगे। सूत्रों का दावा है कि ऊंची पहुंच वाले पॉवरफुल लोगों के दबाव में आकर ही पुलिस को काम करना पड़ेगा। भुवनेश कंपाउंडर होने के साथ साथ अनाधिकृत रूप से एंबुलेंस सर्विसेज उपलब्ध करवाता है। सरकारी तनख्वाह लेकर ड्यूटी करने के बजाय भुवनेश दिन रात अपनी दुकानदारी चलाने में लगा रहता है। पीबीएम के बड़े चिकित्सकों का भी इससे काम बनता है, ऐसे में अमानवीय कृत्य को नजरंदाज कर भुवनेश को बचाने में कुछ चिकित्सक भी लगे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ सालों पहले प्रभारी मंत्री द्वारा चलाए गए ऑपरेशन प्रिंस में भी भुवनेश को सबूतों के साथ ट्रैप किया गया था। बाद में एपीओ कर पीबीएम से हटाया भी गया। लेकिन बड़े दबाव के चलते पुनः पीबीएम में ही पोस्टिंग देनी पड़ी। लंबे समय से पीबीएम में पोस्टिंग लेकर एंबुलेंस सर्विसेज की दुकानदारी चलाने वाला भुवनेश ताकतवर लोगों की सेवा में भी कोई कसर नहीं छोड़ता। इसी वजह से गरीबों से की लूटमार भी नजरंदाज हो जाती है।
पुलिस चाहे तो कोरोना काल में भी ऑक्सीजन की कालाबाजारी जैसा घोर अमानवीय कृत्य करने वाले भुवनेस को जेल की हवा खिलवा सकती है। खिलानी भी चाहिए, अगर इस अमानवीय कृत्य के लिए भी उसे सजा नहीं दिलाई गई तो अन्य माफिया भी भोली जनता का यूं ही शोषण करेंगे।
पीबीएम के सूत्रों की मानें तो भुवनेश का यह खेल कोरोना काल में ही शुरू नहीं हुआ है। लंबे समय से एंबुलेंस सर्विसेज में व उसकी आड़ में आमजन से लूटमार जारी है। हाल ही में इसने जयपुर से बीकानेर तक एंबुलेंस सेवा देने के 16000 रूपए ले लिए थे। जबकि करीब 8 हजार रुपए में आना जाना हो सकता है।
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