15 May 2026 10:21 PM


ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। गंगाशहर में बिजली विभाग द्वारा खेजड़ी की छंटाई के बाद मामला गरमा गया है। गंगाशहर थाने के पास सड़क पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं व जीव प्रेमियों ने धरना लगा दिया है। अब आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है।

ये है हकीकत : तेरापंथ भवन के सामने नाहटा परिवार का मकान है। यहां घर के आगे विशाल खेजड़ी है। खेजड़ी के अत्यधिक बढ़ जाने की वजह से घर को क्षति पहुंच रही है। दीवारों में दरारें आ चुकी है। ऐसे में घर गिरने की आशंका बनी हुई है। जान-माल का संकट बना हुआ है।
इसी समस्या से ग्रस्त नाहटा परिवार ने प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। बिजली विभाग को भी प्रार्थना पत्र दिया। पत्र में स्पष्ट रूप से कटाई-छंटाई कर समाधान करने की अपील की गई।
बिजली विभाग जो कि वर्तमान में बिजली कंपनी बीकेईएसएल के हाथ में है, उसके द्वारा नाहटा के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए मौका स्थिति देखी गई। एईएन द्वारा मदन लाल व राजू नाम के कर्मचारी को खेजड़ी की आवश्यक छंटाई हेतु भेजा गया।
-बिजली विभाग ने की खेजड़ी की छंटाई, निशाना बना नाहटा परिवार: दरअसल, खेजड़ी की कटाई हुई ही नहीं। यह छंटाई थी। इसका प्रमाण यह है कि मौके पर अभी भी 10 से 15 फीट तक पेड़ यथास्थिति मौजूद है। केवल डालियों की छंटाई की गई। यह छंटाई बिजली विभाग यानी बिजली कंपनी के कर्मचारियों द्वारा करवाई गई। इससे पहले बिजली की लाइन भी बंद की गई। इसके बाद मामला गरमा गया। अब निशाना नाहटा परिवार को बनाया जा रहा है। जबकि छंटाई का यह कार्य बिजली विभाग द्वारा किया गया है।
-सोलर कंपनियों पर नहीं आई आंच, केवल आम आदमी प्रताड़ित: पेड़ है तो इंसान के लिए ही ना। जब घर संकट में हो तो व्यक्ति प्रार्थना पत्र क्यों ना दे? खेजड़ी जरूरी है मगर क्या किसी की जान से ज्यादा जरूरी है? पिछले समय सोलर कंपनियों ने लाखों पेड़ काटे। इससे पहले भी खेजड़ी कटती रही है। आज तक एक भी ताकतवर व्यक्ति गिरफ्तार नहीं हुआ। हालांकि गिरफ्तारी तो करे भी कैसे? अधिक से अधिक पाबंद कर सकते हैं। सवाल यह है कि एक व्यक्ति जिसने खेजड़ी काटी ही नहीं, उसको निशाना क्यों बनाया जा रहा है? सवाल यह है कि खेजड़ी की छंटाई ही की गई फिर कटाई का मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है? सवाल यह है कि छंटाई का कार्य बिजली विभाग ने किया, फिर विभाग पर कोई एक्शन क्यों नहीं? सवाल यह है कि क्या मामले का राजनीतिकरण हो चुका है?
ख़बर लिखे जाने तक धरना जारी था। पुलिस समझाइश का प्रयास कर रही थी। अब देखना यह है कि धरना प्रदर्शन के दम पर एक बार फिर किसी निर्दोष व कमजोर को दंडित किया जाता है या सत्य जीतता है?


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