23 January 2026 04:47 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। पीबीएम में दवाइयों की शॉर्टेज ने मरीजों का वॉल्टेज बढ़ा दिया है। इमरजेंसी व रेगुलर दवाईयों की कमी की वजह से आए दिन हंगामें हो रहे हैं। गुरूवार को भी न्यूरो के एक मरीज को जब कैल्सियम की दवाई नहीं मिली तो उसने हंगामा किया। इसके बाद शिकायत मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ सुरेंद्र वर्मा तक भी पहुंची। ऐसे हंगामें कमोबेश रोज हो रहे हैं।
दरअसल, पिछले 7-8 माह से पीबीएम में दवाओं की शॉर्टेज चल रही है। ड्रग वेयर हाउस के नोडल अधिकारी डॉ शिवशंकर झंवर के अनुसार करीब 60 तरह की दवाओं की शॉर्टेज चल रही है। हालांकि इमरजेंसी दवाएं स्थानीय स्तर पर खरीदी जा रही है।
बता दें कि पिछले 7-8 माह से कैल्शियम, विटामिन सी जैसी रेगुलर दवाईयां नियमित रूप से नहीं मिल रही है। इससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। पीबीएम अधीक्षक डॉ बीसी घीया ने कहा कि ये दवाएं इतनी महत्वपूर्ण नहीं है। कैल्शियम की आपूर्ति दूध व विटामिन सी की आपूर्ति नींबू आदि से भी की जा सकती है। हालांकि यह जवाब भी सवाल खड़े करता है। अगर मरीजों के लिए दूध और नींबू तुरंत काम करते हैं तो दवाओं का डोज क्यों दिया जा रहा है?
जानकारी मिली है कि मिक्स इंसुलिन 3070 की भी भारी शॉर्टेज चल रही है। यह काफी आवश्यक ड्रग है। हालांकि नोडल अधिकारी का कहना है कि इसका भी विकल्प मौजूद है। इसके अतिरिक्त काफी तरह की एंटीबायोटिक दवाएं भी अनुपलब्ध है।
इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि पीबीएम जैसे अस्पताल में इतने लंबे समय तक दवाओं की शॉर्टेज का कारण क्या है? पीबीएम में दवाओं की आपूर्ति राजस्थान मेडिकल ड्रग कॉर्पोरेशन करवाता है। लगातार 7-8 माह तक दवाएं ना आने के पीछे कोई कूटनीतिक कारण है या ढ़िलाई है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
आरोप यह भी है कि लोकल परचेज बढ़ाकर बड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ऊपर से दवा आपूर्ति रोकी गई है। बता दें कि पीबीएम में दवाओं की आपूर्ति में बड़ा खेल होता है।
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