11 August 2020 08:53 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। सचिन पायलट की घर वापसी ने राजस्थान के सियासी संग्राम को नया मोड़ दे दिया है। अब मुख्यमंत्री गहलोत के लगाए आरोप खुद गहलोत से ही चिल्ला चिल्लाकर सवाल करने लगे हैं, तो सचिन की खामोशी भी टूट गई है। उपमुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अब केवल मात्र विधायक है। गहलोत के शब्दों को लेकर आज सचिन ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि वे तब भी चुप थे, आज भी कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे, मगर उन्हें बेहद दुख और पीड़ा है। सचिन ने कहा कि सम्मान बना रहना चाहिए, राजनीति में व्यक्तिगत द्वेष व ईर्ष्या को दूर रखना चाहिए। ऐसे में भले ही सचिन ने 'वनवास' के दौरान मौन रखा हो, मगर घर वापसी के बाद उन्होंने गहलोत व उनके बीच के वैमनस्य को उजागर कर दिया है। तो दूसरी ओर पैंतीस करोड़ में विधायक बिकने के बयानों पर गहलोत घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर पूछा जा रहा है कि कांग्रेसी विधायक अब उन पैसों का क्या करेंगे, पार्टी फंड में चंदा देंगे ?? बता दें कि आज जब सचिन जयपुर लौटे तो कार्यकर्ताओं ने जमकर खुशियां मनाई। आई लव यू सचिन का शोर गूंज उठा। सीधे तौर पर देखा जाए तो इस संग्राम में गहलोत जीत गए हैं। हालांकि यह जीत कितनी लंबी चलेगी यह कहा नहीं जा सकता। गांधी परिवार से मुलाकात के बाद बिना किसी बड़े कमिटमेंट के सचिन का लौटना अकारण नहीं लगता। प्रदेश अध्यक्ष के पद से डोटासरा को अब इतनी जल्दी हटाया नहीं जा सकता। वहीं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर गहलोत का अधिकार है। ऐसे में अब सचिन की घर वापसी कांग्रेस में किसी बड़े चौंकाने वाले बदलाव की ओर संकेत करती है। सर्वविदित है कि सचिन राहुल के नजदीकी हैं और अब प्रियंका भी सचिन के पक्ष में अधिक दिख रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस राष्ट्रीय के अध्यक्ष पद को लेकर सचिन से कहीं कोई कमिटमेंट की जा चुकी है??
अंदर की बात कुछ भी हो मगर यह भूचाल अभी थमता नहीं दिख रहा। फिर चाहे इस भूचाल का असर पार्टी पर हो या गहलोत पर, मगर कुछ तो है जो चौंकाने वाला है।
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