07 April 2020 12:17 PM

डर रहे लोग, सभी तरह के मीडिया को सुप्रीम कोर्ट का आदेश
ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। कोरोना इमरजेंसी में भय पैदा करने वालों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। 31 मार्च को ही यह आदेश जारी हो चुका है। इसके अनुसार प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वेब पोर्टल व सोशल मीडिया पर कोरोना से जुड़ी जानकारी बिना जिला प्रशासन, राज्य सरकार अथवा केंद्र सरकार की लिखित पुष्टि के जारी नहीं की जा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी भी तरह के मीडिया माध्यम द्वारा कोरोना से जुड़ी कोई भी ख़बर पैनिक करने वाली भाषा में भी नहीं डाली जा सकती। अलख आलोक श्रीवास्तव ने रिट में कहा था कि ये चारों मीडिया माध्यम से झूठी, भ्रामक, भय पैदा करने वाली ख़बरें और मैसेज प्रसारित व प्रचारित करते हैं। कहा गया कि कुछ पोर्टल तो प्रतिस्पर्धा के दौर में ख़बर को बढ़ा चढ़ाकर व हैडिंग कुछ और अंदर कुछ लिखकर लगाते हैं। तर्क था कि ज्यादातर लोग हैडिंग ही पढ़ते हैं, ऐसे में महामारी के इस कठिन समय में लोगों को डराने वाली ख़बरें घातक है। उल्लेखनीय है कि पिटिशनर ने 1 जनवरी से 28 मार्च तक की पूरी घटनाओं का विवरण दिया था।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को समझते हुए कुछ भी लिखने और वायरल करने से पहले सोच-समझ लेना चाहिए। ख़बरमंडी न्यूज़ आपसे अपील करता है कि सोशल मीडिया पर आ रहे मैसेज, आदेश आदि पर यकीन न करें। वहीं कोई भी जानकारी अपडेट न करें।
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