31 May 2020 03:02 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। घोटालों का गढ़ माने जाने वाले पीबीएम में अब चंद पैसों के फायदे के लिए छोटे-छोटे ठेकेदारों को रास्ते से हटाने की साज़िश चल रही है। मामला वार्ड बॉय के टेंडर से जुड़ा है। आरोप है कि पीबीएम अधीक्षक ने मिलीभगत से यह चाल चली है। यह टेंडर पूर्व में नब्बे दिन की समयावधि पूरी होने से रद्द कर दिया गया था। लेकिन अब टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई तो छोटे ठेकेदारों को बेरोजगार करने वाली शर्ते टेंडर भरने के लिए रखी गई है। बताया जा रहा है कि अब तक पचास लाख का सालाना टर्न ओवर करने वाली फर्म टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो सकती थी, जिसे बढ़ाकर अब दो साल तक प्रतिवर्ष दो करोड़ कर दिया गया है। वहीं पचास लाख की बैंक गारंटी अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा तीसरा बड़ा बदलाव फर्म के अनुभव है, जो पहले चालीस लड़कों का था लेकिन अब बढ़ाते हुए 72 कर दिया गया है। आरोप है कि पीबीएम के अधिकारी अपने फायदे के लिए बड़ी कंपनियों को ठेका देना चाहते हैं। इसमें पीबीएम अधिकारियों सहित कुछ बाहरी लोगों की मिलीभगत भी बताई जा रही है। बता दें कि अब तक यह ठेका खुश्बू एंटरप्राइजेज, निकिता एंटरप्राइजेज, आर के मानव संस्थान व मारुति के पास था। उल्लेखनीय है कि एक तरफ कोरोना से तबाह अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छोटे कारोबारियों को अवसर देने की बात कही है तो दूसरी तरफ चंद पैसों के लालच में छोटे ठेकेदारों की कमर तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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