14 June 2020 05:58 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। कोरोना से बचने व उसके इलाज को लेकर पूरे विश्व में रिसर्च चल रही है। इसी बीच राजस्थान के चुरू जिले का एक चूर्ण व काढ़ा कोरोना के इलाज में काफी असरदार बताया जा रहा है। चुरू प्रशासन ने इसे फायदेमंद मानते हुए उपयोग शुरू कर दिया है। वहीं भीलवाड़ा, दिल्ली और बहुत सारे प्रदेशों में इसे कोरोना मरीजों को भी दिया जा रहा है। दरअसल, यह चूर्ण चुरू जिले के सरदारशहर में स्थित गांधी विद्या मंदिर द्वारा बनाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रतिदिन एक लाख पैकेट अभी इस चूर्ण के तैयार हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार यह सर्वज्वरहर चूर्ण सात सौ साल पुराने श्री ए नागराज द्वारा दिया गया था। ए नागराज मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद के प्रणेता थे। ख़ास बात यह है कि इसमें उपयोग होने वाली सभी दस चीज़ें प्राय: हर घर में मिल जाती है। वैसे तो संस्थान इस काढ़े का एक पैकेट बीस रूपए में उपलब्ध करवा रहा है जिसे ऑनलाइन मंगवाने का लिंक ख़बरमंडी न्यूज़ के पास उपलब्ध है। मगर इसे आप घर पर भी आसानी से बना सकते हैं। बता दें कि दस ग्राम चूर्ण से सात लोगों की दवा तैयार हो जाती है। वहीं दस ग्राम चूर्ण बनाने के लिए सौंठ, काली मिर्च व पीपली 1.53 ग्राम प्रति लेनी है। वहीं लौंग, छोटी इलायची, बड़ी इलायची, दालचीनी, जायफल, जावित्री व तुलसी पत्र 0.769 ग्राम प्रति के हिसाब से लेना है। इन सभी को पीसकर चूर्ण तैयार करना होता है। बताया जा रहा है कि ये सभी मसालें हैं तथा इनसे बना यह चूर्ण प्रतिदिन चाय,कॉफी अथवा अन्य पेय पदार्थों में ले सकते हैं। वहीं संक्रमण अथवा संदिग्ध होने की दशा में तीन दिनों तक इसका काढ़ा बनाकर लिया जा सकता है। बता दें कि एक व्यक्ति के लिए 100 मि ली काढ़ा तैयार करना है। जिसके लिए सौ मि ली उबलते पानी में डेढ़ ग्राम चूर्ण डालें तथा दस मिनट ढ़क दें। इसके बाद इसे छानकर पी लें। संस्थान के अनुसार यह एक पूर्णतया हर्बल चूर्ण है। बताया जा रहा है कि इसके सेवन से नये पुराने मियादी बुखार, भूख की कमी, सिरदर्द, श्वास पथ में संक्रमण, दुर्बलता, कफ, खांसी आदि ठीक हो जाते हैं। वहीं दावा किया जा रहा है कि इस चूर्ण का स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं होता।
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