30 November 2025 10:07 AM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। नशे ने बीकानेर को इस कद्र घेर लिया है कि अब हर माता-पिता अपने बेटों को लेकर घबराए हुए हैं। उन्हें ये डर रहता है कि कहीं उनका बेटा किसी नशेड़ी की संगत में पड़कर नशेड़ी ना बन जाए। यही हाल कमोबेश नशा तस्करों के परिवारों का भी है। हालांकि कई तस्करों के तो परिवार ही नशा तस्करी में शामिल हैं। नशा तस्करी कर बीकानेर की रगों में जहर घोलने वाले ये तस्कर पुलिस की नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। ये तस्करी के नये नये हथकंडे अपना रहे हैं।
शनिवार को डीएसटी द्वारा हुई एक कार्रवाई ने भी चौंका दिया। पुलिस ऑडी कार में डोडा तस्करों को धरदबोचा। कार में 152 किलो 900 ग्राम डोडा मिला। पुलिस ने कार चालक व सवार को गिरफ्तार कर लिया।आरोपियों की पहचान तिलकनगर, बीकानेर निवासी 40 वर्षीय सुभाष उर्फ सुभान पुत्र बृजलाल मिरासी व चौखूंटी फाटक, कर्बला रोड़, कोटगेट थाना क्षेत्र निवासी 27 वर्षीय इरफान पुत्र रज्जाक कायमखानी के रूप में हुई।
यह कार्रवाई देशनोक थाना क्षेत्र की भारतमाला रोड़ के समीप की गई। डीएसटी प्रभारी विश्वजीत सिंह मय टीम ने इनपुट के आधार यह कार्रवाई की।
चौंकाने वाली बात यह है कि तस्कर एक लग्जरी कार में मध्यप्रदेश के मंदसौर से यह डोडा लेकर आए। मामले की जांच अब नोखा थानाधिकारी अरविंद भारद्वाज को दी गई है। जांच में अन्य तथ्यों का खुलासा होगा।
-भारतमाला बन गया तस्करों का रास्ता: दरअसल, भारतमाला रोड़ पर अत्यधिक गति से वाहन चलते हैं। आमतौर पर पुलिस भी मौजूद नहीं रहती। ये मार्ग एक्सप्रेस वे हैं। ऐसे में तस्करों के लिए यह मार्ग बेहद सुविधाजनक साबित हो रहे हैं। गति की वजह से समय भी कम लगता है तो पुलिस का भय भी नहीं रहता।
-आख़िर कैसे आती है ऑडी जैसी लग्जरी कारें: इन तस्करों के पास ऑडी जैसी लग्जरी कारें आई कहां से, यह बड़ा सवाल है। अनुमान है कि ये तस्कर बड़े पैमाने पर नशे का धंधा कर रहे हैं। इनकी जड़ें नीचे से ऊपर तक हैं। डोडा के अलावा भी कई तरह के मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही है।
-जड़ों तक नहीं पहुंचती पुलिस, इसीलिए नहीं खत्म हो रही तस्करी: दरअसल, हर बार पकड़े गए तस्करों को जेल में डालकर व उनके खिलाफ चालान कर जांच की इतिश्री कर ली जाती है। पुलिस इन तस्करों की जड़ें ही नहीं खोदती। एक तरफ तस्करों को पकड़ने में काफी मशक्कत करती पुलिस आख़िर तस्करों के पकड़े जाने के बाद जांच में अंदर तक क्यूं नहीं जाती, ये आश्चर्य का विषय है। जबकि तस्करों की दोनों तरफ बड़ी श्रृंखला होती है।
इस मामले में सुभाष व इरफान मंदसौर से किससे नशा खरीदकर लाए, उसकी गिरफ्तारी भी होनी चाहिए। पूर्व में की गई तस्करी और उससे जुड़े तस्करों को भी लपेटे में लेना चाहिए।
अगर पुलिस हर मुकदमें में जड़ें खोदना शुरू करके दोनों तरफ की श्रृंखला को लपेटे में लेना शुरू कर दे तो नशे का खात्मा काफी हद तक किया जा सकता है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले की जांच कितनी गहनता से करती है।

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