03 December 2020 07:12 PM

ख़बरमंडी न्यूज़, बीकानेर। कोरोना काल में नाबालिग विद्यार्थी को मानसिक व आर्थिक क्षति पहुंचाते हुए शिक्षा में बाधा पहुंचाने के मामले में आकाश इंस्टीट्यूट बीकानेर को लिगल नोटिस दिया गया है। मामला 16 वर्षीय कृष्ण कुमार पुत्र हरीश भाटी से जुड़ा है। भाटी के अधिवक्ता अनिल सोनी ने बताया कि कृष्ण ने आकाश इंस्टीट्यूट के लुभावने विज्ञापन व बातों पर यकीन करके एडमिशन ले लिया। एडमिशन लेने से पहले इंस्टीट्यूट द्वारा उच्च गुणवत्ता के ऑनलाइन सिस्टम से शिक्षा देने का मौखिक वादा किया गया। वहीं यह भी स्पष्ट किया गया कि यह ऑनलाइन शिक्षा मोबाइल से नहीं दी जाएगी। इस पर 8 सितंबर 2020 को 22700 रूपए जमा करवाते हुए एडमिशन की प्रक्रिया पूर्ण की गई। इसी दिन से ऑनलाइन क्लास शुरू हुई। एडमिशन के समय विद्यार्थी ने बताया कि वह फिजिक्स विषय में कमजोर है, ऐसे में इस विषय को लेकर उस पर विशेष ध्यान दिया जाए।
आरोप है कि आकाश इंस्टीट्यूट अपने वादों पर खरा नहीं उतरा। इस दौरान 3 अक्टूबर तक शिक्षा ली गई। इन दिनों में तीन बार फिजिक्स की क्लास लगी, लेकिन तीनों बार शिक्षक अलग अलग थे। उस पर भी पढ़ाने की भाषा शैली कठिन व उच्च क्वालिटी के सिस्टम के बजाय मोबाइल के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाया जाता। आरोप है कि आकाश इंस्टीट्यूट के इस रवैये से विद्यार्थी अवसाद में जाने लगे। 6 अक्टूबर को इंस्टीट्यूट को समस्या को लेकर शिकायत भी की गई, लेकिन समाधान नहीं हुआ तब अभिभावक ने विद्यार्थी का एडमिशन अन्य इंस्टीटयूट में करवा दिया। कृष्ण के पिता हरीश का कहना है कि उनका बच्चा अवसाद में जाने लगा था। वहीं इंस्टीटयूट समाधान नहीं कर रहा था।
ऐसे में दूसरे इंस्टीट्यूट में दाखिला करवाना पड़ा। आरोप है कि सबकुछ साफ होने के बजाय आकाश इंस्टीट्यूट द्वारा फीस के पैसे नहीं लौटाए जा रहे हैं। हरीश द्वारा तकादा करने पर इंस्टीटयूट ने धमकी दी बताते हैं।
एडवोकेट सोनी ने बताया कि लिगल नोटिस के माध्यम से फीस व वकील की फीस की मांग की गई है। इंस्टीट्यूट द्वारा सुनवाई न करने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। नोटिस आकाश इंस्टीट्यूट बीकानेर, निदेशक राजेश शर्मा व सीईओ अर्पित माहेश्वरी के नाम जारी किया गया है।
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